Saturday, 8 September 2018

Cobol retrofitting tool using Tag , Abhishek Yadav


This is the COBOL retrofitting tool , its unique in the world and patent also..
Currently it is not available anywhere in the world..












Monday, 2 July 2018

रहस्यमय वक्ता बने

रहस्यमय वक्ता बने  

वक़्त को एक स्केल की तरह समझे जिसमे बराबर बराबर खांचे बने हैं,शब्द और  रहस्य वक़्त के खाचों में एक के बाद एक रखना सीखे।   

याद रखिये यह गुण लाने में समय लग सकता है ,लेकिन यह आपके व्यक्तितत्व विकास के सबसे  महत्त्वपूर्ण क़दमों में से एक है। 

आइये इन्हे कुछ उदाहरणों से समझते हैं। एक सच्ची कहानी से।  

कहानी की शुरआत करने के पहले ,में अभिषेक यादव आप सभी का  स्वागत करता हूँ। 

1951 न्यूयोर्क , दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक नगरी : --- हाँ ये कहानी वही की है 

एक बार एक मोची ने अपने लड़के से कहा बेटा मैंने तुझे स्कूल  तक तो पढ़ा दिया है पर मेरे पास इतना पैसा तो नहीं है जो में तुझे कॉलेज भेज सकूं अच्छा है तू ये धंधा सीख ले , बेटे ने कहा  भले  ही में अपने लिए पैसे कमा पाऊं या नहीं  पर आपने मुझे स्कूल भेज कर इतनी  शिक्षा तो दे ही दी है की में  आपको एक धनी पिता बना सकूं। 

मोची को लगा मेरा बीटा ओवर कॉन्फिडेंस में है और इसको दुनियादारी की कोई समझ नहीं है। 

इसके विपरीत लड़के के मन में तो जैसे कुछ और ही चल रहा था , उसने बड़ा अनोखा काम किया उसने दो लिस्ट बनाई पहली उन सारे जूतों के शोरूम्स की जो न्यूयोर्क के सबसे बड़े बड़े शोरूम्स  होने के साथ साथ न्यूयोर्क  शहर की शान भी थे , दूसरी लिस्ट उन रहीस गोल्फ प्लेयर्स की थी जो जूतों के बहुत बड़े शौक़ीन थे , और वे अक्सर इन दुकानों में आया करते थे उनमे से भी उसने उन लोगों को चुना जिनका नाम अखबारों में आये दिन आया करता था 

लिस्ट के हिसाब से 1951  में  न्यूयोर्क में  जूतों के  बड़े बड़े 21  शोरूम थे  , फिर क्या था एक दिन वो चल पड़ा मार्केट  की तरफ , पता नहीं उसने ऐसा क्यू  किया की वो पहले  नहीं बल्कि ,दूसरे नंबर के सबसे बड़े शोरूम के मालिक के पास गया और बोला मिस्टर रोबर्ट यहाँ आते हैं क्या ? दुकानदार ने नाटक किया जैसे वो रोबर्ट को जानता ही नहीं,,क्योकि मिस्टर रोबर्ट बहुत ज्यादा बड़े आदमी थे और वे सबसे बड़े शोरूम में ही आया जाया करते थे ,यदि दुकानदार ये बोलता की वो बगल वाले सबसे बड़े शोरूम में जाते हैं तो इससे उसके दुकान छोटी साबित होती  ,जैसे ही दुकानदार ने बोला की मिस्टर रोबर्ट को वो नहीं जानता , लड़के का चेहरा जैसे गुस्से से लाल हो गया उसने  बड़े कड़क शब्दों में अपनी नाराज़गी प्रदर्शित की और अपने आप से बात करते हुए बोला , अब कुछ भी हो जाए रोबर्ट खुद भी आ जाए तो में उससे मिलने नहीं आऊंगा ,उसे चलकर मेरे पिता के पास आना पड़ेगा , जैसे ही ये शब्द दुकान के मालिक के कानो में पड़े  , वो  इतना प्रभावित हुआ की उसने उस लड़के को अपने केबिन में आने का आग्रह किया , 
लड़के ने कहा पहली बात की में गुस्से में हूँ और आज  मेरे पास समय नहीं है , कल दोपहर १२ बजे देखूंगा , फिर क्या था  दुकान का मालिक दुसरे दिन बड़ी बेसब्री से इंतज़ार करने लगा ,१२ बज चुके थे उसका मन किसी काम में नहीं लग रहा था ,१२ :१० हुए लड़का अभी तक नहीं आया था फिर १२:३० बज लड़के का अभी तक कोई अत पता नहीं था , दूकानदार अपनी उम्मीद खोने लगा ,तभी १२:४५ पर वो लड़का दूर से आता हुआ दिखाई दिया , जैसे हे वो पंहुचा , दुकान के मालिक ने बिना समय गवाए लड़के से पुछा आप कल कुछ बोल रहे थे रोबर्ट के बारे में ,क्षमा चाहता हूँ में रोबर्ट को जानता हूँ वो बहुत बड़े आदमी हैं पर मेरी दुकान पर नहीं आते , लड़के ने गंभीर मुद्रा में बोला सिर्फ ५ मिनट हैं आपके पास जल्दी बताइये क्या चाहते  हैं आप मेरे से ?

दुकान का मालिक सोच में पड़ गया उसे कुछ बोला नहीं जा रहा था , लड़के ने घडी देखी  अब  ३  मिनिट बीत गए थे  , लड़के ने अब जो बोला उससे कोई भी सहम जाता , उसने जवाब दिया आप न्यूयोर्क शू मार्केट  के बेताज बादशाह या यु कहे नंबर १ बनाना चाह्ते हैं क्या ये सही है , दुकान का मालिक हक्का बक्का रह गया , लड़के ने कहा अब १ मिनट बचा है आपके पास ,दुकान का मालिक पसीना पसीना हो गया और हकलाकर बोला हाँ।

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ये था कहानी का पहला पार्ट , इसके बाद क्या हुआ , क्या किया लड़के ने , रोबर्ट का क्या हुआ , दूसरे नंबर का  दूकानदार नंबर १ बन पाया ? जवाब मिलेगा इसके दुसरे पार्ट में कहानी बहुत ही  रोमांचक  है , अगला पार्ट देखने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करे , 
तब तक के लिए में अभिषेक यादव आपकी इज़ाज़त चाहता हूँ धन्यवाद 
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लड़के ने बताया आप के लिए इतना जानना काफी होगा मेरे पिताजी एक बहुत बड़े रचनाकार हैं उनमे ऐसे गुण हैं जिससे वे दुनिया की  किसी भी चीज़ की सबसे बिरली आकृति बना सकते हैं हाल ही  में रोबर्ट का मैनेजर मुझसे मिला था और जूतों के ऐसी डिज़ाइन चाहता था जो सबसे प्रभावशाली दिखे , मेरे पिता एकांतवासी हैं और किसी से नहीं मिलते मैंने अपने पिता से मिलवाने के लिए १ महीने पहले उनको आज का समय दिया था पर वो नहीं आये ,न ही उसने कोई संदेसा भिजवाया , 

लड़के ने कहा वो डिज़ाइन तैयार है तुम मुझे १०० आदमी दो जो इस पर काम कर सके  ,में अपने पिता को आग्रह करके  आपके कारखाने में ले आऊंगा , बस शर्त ये है में एक सफल व्यापारी हूँ और मेरे पिता रचनाकार , जब  तक जूते तैयार नहीं हो जाते तब तक पिताजी  सिर्फ कारीगरों से मिलेंगे बाद में आप उनसे  मिल सकते हैं।  

जब लड़का घर गया ,उसने  अपने पिता से बोला पिताजी मुझे मालूम है आपने अपनी जवानी में कुछ ऐसे जूते बनाये थे जो गोल्फ प्लेयर्स के लिए वरदान साबित हुए थे ,आपने वो बनाना क्यों छोड़ दिया था ? पिता ने जवाब दिया वो मैंने कारखाने में बनाये थे उसमे अनुभव के साथ मशीनो की भी जरूरत  होती है। 
दुर्भाग्य से कुछ दिनों बाद कारखाने में आग लग गयी और में बेरोजगार हो गया , पिता ने बोला एक ही बात कितनी बार पूछेगा मुझसे।  

लड़के ने पिता से ये बात पहले भी सुनी थी उसने तुरंत बोला पिताजी , अब कारखाना भी है और कारीगर भी हैं , कारखाने का मालिक ये चाहता है की आप ५० कारीगरों आधा काम सिखाये और जब आधा काम हो जाये तो बाकि ५० कररगरों को बचा हुआ आधा काम , कहने का मतलब साफ़ था कोई भी कारीगर को पूरी विधि नहीं आनी चाहिए। 

पिता ने ऐसा ही  किया,, अब जूते तैयार थे, दुकान का मालिक जूते देखकर हैरान हो गया ऐसे जूते उसने ज़िन्दगी में कभी नहीं देखे थे , वो तुरंत बोला  अब चले रोबर्ट के मैनेजर के पास ,लड़के ने बोला  उसे  तो मैंने उसी दिन अपने से मिलने वालों के लिस्ट से हटा दिया था , 

अब तो तुम  ये बताओ शहर में सबसे बड़ा गोल्फ का शौक़ीन कौन है दुकानदार ने बताया विल्सन और जेफ़र्सन जिसमे से  जेफ़र्सन विल्सन  के गुरु थे और हाल ही में १ हफ्ते पहले उनका निधन हुआ था। 

लड़के ने पुछा ये खबर आपको कहा मिली , दुकानदार बोला रेडियो पर वो वैसे भी बहुत बड़े आदमी थे तो अख़बारों में भी छपा था , लड़के ने पुछा कुछ गोल्फ के बारे में जानते हो वो क्या चाह्ते थे , दुकानदार बोला हाँ वो एक टीम बनाना चाहते थे गोल्फ की। 

लड़के ने बोला चलो विल्सन के यहाँ , विल्सन  बड़ा आदमी था जब ये दोनों वह  पहुंचे गार्ड ने उन्हें रोक लिया , लड़के ने बोला हमे अपॉइंटमेंट की जरूरत नहीं आप विल्सन  को बोल सकते हैं , गार्ड ने पहले कभी किसी को विल्सन  को सीधे विल्सन  कहते नहीं सुना था. उन्हें लोग सर विल्सन  कहते थे , गार्ड ने उन्हें जाने दिया विल्सन  तेजमिज़ाज़ आदमी था ,लड़के ने उससे  बोला बिना इज़ाज़त आपसे मिलना पड़ा मगर वजह बहुत बड़ी है असल में मै जेफ़र्सन  से मिलना चाहता था क्योकि वे इतने बड़े गोल्फ प्लेयर थे और में उनकी टीम को बेमिसाल तोहफा देने से चूक गया , फिर लड़के ने जूतों का एक जोड़ा विल्सन को दिखाया जूतों में बात थी , विल्सन अब नम्र हो चूका था , बोला कितने जूते हैं ये ,और इनका कितना धन देना पड़ेगा 
अब वो पड़ाव था जो संवेदनशील था लड़के ने बोला जो भी देना है दे दीजिये बस इतना समझ लीजिये सर जेफ़र्सन  के  नाम से ये जूते पहली बार दुनिया देखेगी आप  उनकी प्रतिभा के हिसाब और आपकी उनके प्रति  जितनी निष्ठां  है उसके  हिसाब से दे दीजिये ,

पर  मे चाहूंगा  ये बात पूरा न्यूयोर्क यहाँ सबसे बड़े अख़बार के माध्यम से जाने , फिर क्या था विल्सन ने  उन जूतों की वो कीमत दी जो सपने में कल्पना न थी , दुकानदार को ४०% देने के बाद लड़के ने ६०% अपने पिता को दिए  , 

अब वो वक़्त था जब सही मायने में लड़के के पिता इतने बड़े  आदमी  हो  गए  थे की अब सच  में  उनका  अपॉइंटमेंट रोबर्ट जैसे बड़े  आदमी को भी १ महीने बाद ही मिल पाता।  

एक सच्ची घटना को आपने इतने ध्यान से सुना आप सबका धन्यवाद। 

अब में अभिषेक यादव आपसे कुछ  पूछना चाहता हूँ 
१. आखिर लड़का दुसरे नंबर के शोरूम में क्यू गया ?
२. वो १२ बजे बोलकर  १२:४५ को ही क्यू आया ?
३. दुकान के मालिक को उसने अपने पिता से ,या यु कहे की अपने पिता को उसने दुकान के मालिक से क्यू नहीं मिलवाया ?

इसके जवाब आपको मिलेंगे अगले चरण में ,तब तक के लिए आप सभी को अभिषेक यादव की तरफ से अल्प विराम। 



Friday, 8 June 2018

ऐसे थे मेरे प्यारे कलाम !!! aise the mere pyare kalam self creations

में अभिषेक यादव आप सभी का स्वागत करता हूँ , आज में बात करूंगा कलाम साहब की ,
मैंने उनके लिए एक कविता लिखी थी ,जब उनका निधन हुआ था ,और आज में चाहता हूँ ,की मेरी कविता जन जन तक पहुंचे ,
ताकि में उनको एक सच्ची श्रद्धांजलि दे पाउ , उनका न होना हमारे देश के लिए इतनी बड़ी कमी जिसकी पूर्ती नहीं हो सकती।

मेरा एक छोटा सा प्रयास है उनके व्यक्तित्व जो जन जन में जगाने का ,आइये शुरू करते हैं कविता जिसका शीर्षक है

"ऐसे थे मेरे प्यारे कलाम "

ऐसे थे मेरे प्यारे कलाम , सब करते हैं उनको सलाम ,
न किसी से बैर न कभी किया कोई अनैतिक काम ऐसे थे मेंरे कलाम ,

दे दी जिसने शक्ति भारत को ,दे दिया हम सबको वरदान ऐसे थे मेरे साहब कलाम ,
न चाह थी  उनको दौलत की ,न ही था  सत्ता का अभिमान , न खरीद सका अमेरिका तक जिनको  ऐसे अनमोल थे मेरे कलाम ,

चाहे कोई सिख हो ,या हो हिन्दू , ईसाई हो या मानता हो इस्लाम , सबके  प्यारे थे मेरे कलाम , सारी दुनिया करती थी उनको सलाम 
ऐसे थे मेरे कलाम 

अभिमान नहीं रत्ती भर , बस्ते थे उनके बच्चो में प्राण ऐसे थे मेरे प्यारे कलाम 
अखबार बेचे जिन्होंने बचपन में ,घर चलाया अपना और कर दिया अपना बचपन बलिदान ऐसे थे मेरे कलाम 

आज भी जा के देखो साधारण सा घर है उनका , न किया राष्ट्रीय सम्पति का दुरूपयोग लगा दिया सारा धन अपने देश के नाम 
ऐसे देश भक्त थे हमारे साहब कलाम 

तीनो सेना (जल ,थल ,वायु ) अधीन थी जिनके  , वो कर देते थे किसी भी छोटे से कर्मचारी को सलाम , क्या महान व्यक्तित्व था  उनका क्यों न करे हम पूजा उनकी जो दे गए इतना ज्ञान महान , ऐसी विनम्र थे हमारे कलाम 

जब राष्ट्रपति बने तो दिया परिचय फिर से विनम्रता का , बांधते थे अपने खुद के जूते के फीते ,,न करने दिया किसी कर्मचारी को ये काम , देते थे सबको सम्मान ,ऐसे स्वावलम्बी थे मेरे कलाम 

बहुत पुस्तके लिख गए साहब मेरे , वो शब्द नहीं अहसास है मेरे दोस्तों , उतारना उन अहसासों को अपने जीवन में , मिल जायेगा परिचय उनका ,न कर सकूँगा तारीफ उनकी शब्दों में वो व्यक्ति था सबसे निराला और महान , ऐसे थे मेरे साहब कलाम 

आज थर्राती है दुनिया भारत की शक्ति से , करती भारत माँ भी अभिमान , ऐसा पुत्र मिला था जिसको , पूरी दुनिया करती सम्मान ऐसे प्यारे थे मेरे कलाम , आज न रोक सकूँगा अपने आसूं न भूल सकूँगा उनका बलिदान ऐसे प्यारे थे मेरे कलाम 

आज लड़ती है पार्टियां आपस में , निकालती हैं बुराइयां एक दूसरे में , उसी देश में था भारत माँ का ये लाल जिसको कुछ बोलने की हिम्मत नहीं थी किसी की,, सबकी बंद हो जाती थी जबान ,जब सामने आते थे उनके प्यारे काम , सभी पार्टियां आज भी करती हैं उस महान इंसान को सलाम , ऐसे प्यारे थे मेरे कलाम |

आज के नेताओं को ये सबक है छोडो ये लड़ना झगड़ना ,अपना लो कलाम को अपने जीवन में दुश्मन भी करने लगेंगे सम्मान  , न रहेगी किसी पद की लालसा तुमको,न ही रहेगा पैसो का अभिमान , कठिन है मेरे कलाम का पथ , एक पग तो चल के देखो ,करेगी  दुनिया तुमको भी सलाम , ऐसे प्यारे थे मेरे कलाम 

खून खौल जाता है जब आता है अमेरिका के सीओ-०८३ फ्लाइट का नाम , सुरक्षा के नाम पर जूते उतरवाए थे हमारे कलाम साहब के ,
व्यक्तित्व तो देखो कलाम साहब का कुछ न बोले बेचारे , और अमेरिका हो गया पूरे विश्व में बदनाम , इतना बड़ा था हमारे कलाम का नाम .

पूछता हूँ अमेरिका से,,, क्यों आया था कलाम साहब के पास हज़ारों डॉलर ले के और बोल रहा था नासा में कर लो काम 
दे दिया था जवाब उन्होंने बखूबी ,बोले सच्चा हिंदुस्तानी हूँ में , न कर पाउँगा तुम्हारे नासा में काम 

देशवासियों कभी न जोड़ना धरम से उनका  नाम , न थे वो हिन्दू ,न ईसाई न ही क्रिश्चन और न मुसलमान ,वो तो थे एक सच्चे इंसान ,वो तो थे एक सच्चे इंसान ,वो तो थे एक सच्चे इंसान ........

वैसे तो सवा सौ करोड़ पुत्र हैं भारत माँ के ,पर आज बोलती हैं भारत माँ 
बता दी थी जिसने परमाणु शक्ति पूरे विश्व को ऐसा था मेरा पुत्र कलाम , डरती थी पूरी दुनिया उससे और  सो  जाती थी में चैन से पहले,  ऐसा था मेरा पुत्र कलाम ,किस्मत वाली हूँ में जो मिला मुझे ऐसा पुत्र महान 

करोड़ों का प्रस्ताव ठुकरा दिया विदेशों का ,ऐसे सच्चे देशभकत को  हमारा सलाम  , न भूतो न भविष्यति ऐसे राष्ट्रपति थे हमारे कलाम  

आओ श्रद्धांजलि अर्पित  करे उस महान भारत माँ के पुत्र को और संकल्प करे उतारेंगे उनके विचार जीवन में ,और हर बच्चा होगा एक नया कलाम , ऐसे थे मेरे प्यारे कलाम।  

इतनी शिद्दत और अन्तरदृस्टि से आपने इस कविता को सुना , आप सभी के हृदय में बैठे कलाम साहब को अभिषेक  का  प्रणाम

My Tribute to kalam Sahab : Abhishek Yadav


Tuesday, 5 June 2018

क्या आप आ सकोगे एक बार फिर इस जमाने में "काश हमको नाज़ होता फांसी पर चढ़ जाने में".. -भगत सिंह ,

एक दिन कुछ देश भक्तों ने  दिल से पुकारा भगत  सिंह राजगुरु और सुखदेव को और बोला आज फिर से जरूरत आन पड़ी है आप की ,,क्या आप आ सकोगे एक बार फिर इस जमाने में , 

बोले तीनो ,,, देख रहे हैं  भारत के हालात  इस जमाने में 
हमने तो सर कटवा दिए इन गद्दारों  के सर बचाने में,

एक पल भी न सोचा हमारे बारे में ,,पूरा वक़्त गया लोगो का अंग्रेजी  पढ़वाने में , 
हम तो क्रांतिकारी थे देश भक्त थे , पर जरा भी वक़्त न लगा हमको टेररिस्ट बताने में ( नोट: NCERT Textbooks )
हमने तो सर कटवा दिए इन गद्दारों  के सर बचाने में,

था हमारा देश सोने की चिड़िया,, न वक़्त लगा इनको रूपये को  पैंसठ  गुना गिराने में ( १ डॉलर = ६५   रुपया )
अच्छा है,नहीं छापते लोग हमारी फोटो नोटों में ,,,,नहीं तो रुपया गिरने  के साथ हम भी गिरते जाते  इस जमाने में ..
हमने तो सर कटवा दिए इन निकम्मो  के सर बचाने में

आज हो गए सब देश भक्त हज़ार के नोट नहीं चलते इस ज़माने में 

हमने तो  दिया था पूरा भारत,,आज कश्मीर तक नहीं बचा पाते लोग और वीसा लगता है मानसरोवर जाने में ,
हमने तो सर कटवा दिए इन बुजदिलों  के सर बचाने में

आज बेचारा मर जाता है किसान फसल उगाने में , नेता खाते है हाजमे की गोली अपना खाना पचाने में ,
हमने  तो सर कटवा दिए इन मुफ्तखोरों   के सर बचाने में

जो कर दिखाया हमने सिर्फ तेईस (२३) सालों में ,न कर सके लोग सत्तर (७०) सालों में 
हमने तो सर कटवा दिए इन बेईमानों के सर बचाने में

इंडिया के नाम से जानते हैं लोग आज भारत को , नाम भी न बचा पाये देश का और विश्वास रखते हैं मुंबई को शंघाई बनाने में ,
काश चीन बोलता शंघाई को मुंबई बनाने की बात तो नाज़ होता हमको फांसी पर चढ़ जाने में  .
हमने तो सर कटवा दिए इन अंग्रेज़ों के चमचों  के सर बचाने में 

पाकिस्तान बताता है कश्मीर को अपना ,,चीन समझता है शान अरुणाचल को अपना बताने में , 
भारत माता को नोच रहे थे जब ये दोनों, तब नेता रात बिता रहे थे मैखानो में 
हमने तो सर कटवा दिए इन  ख़ुदग़र्ज़ों  के सर बचाने में 

करोडो खर्च होते हैं उन नेताओ के जन्मदिन पर जिनने पल भर नहीं सोचा  देश लुटाने में , पी. ओ. के. बनवाया , चीन से हारे और शर्म भी नहीं आई अपने आप को  भारत रतन दिलवाने में , हमने तो सर कटवा दिए इन बुजदिलों  के सर बचाने में

करोडो खर्च हुए कसाब पर और मुशर्रफ को बुलाने में , दे देते ये पैसा किसानो को तो न करते आत्महत्या , जान आ जाती बेचारों में 

पेट्रोल के दाम बढे तो कुयूं  फैलाते हो विदेशों के सामने हाथ , क्या शर्म आती है इज़्ज़त से साइकिल चलाने में 
हमने तो सर कटवा दिए इज़्ज़त की  ज़िंदगी दिलवाने  में

फेस बुक और व्हाट्सअप पर हमको शेयर करने वालों कभी सच्चे दिल से हमको याद करना ,
एक सौ चौदह (११४) नहीं  सिर्फ एक दिन भूखे प्यासे बिताना तहखानों में , समझ आ जायेगा क्या तेज था हम देश भक्त दीवानों में 

नहीं चाह है ,भारत रतन की हमको ,  बस   अनुरोध है , आज की पीढ़ी से ,,जगा लेना  देशभक्ति अपने दिलों में ,
जगा देना  फिर वही जज़्बा अपने बच्चों और यारों में  ,पैदा हो जाएंगे हम आने वाले जवानो में , 
इंसान नहीं विचार हैं  हम ,कभी मर नहीं सकते , अभी भी जिन्दा हैं बस देख लेना  सच्चे देश भक्त जवानो में ,
हमने तो सर कटवा दिए यही जज़्बा जगाने  में

पकड़ना टुकड़ा बर्फ का  सिर्फ १० मिनिटों के लिए  हाथों में,, पता चल जायेगा , कैसे बिताईं थीं हमने एक सौ चौदह रातें , बर्फ की सिल्लियों पर उन गर्म जोश जज़बातों में .

कर सकते देश की सेवा कुछ दिन और, यदि न कांपते नेताओ के हाथ हमको बचाने में ,
जिन्दा होते तो फहरा देते तिरंगा पूरी दुनिया में इन सत्तर (७०)  सालों में ,
ऐ मेरी माँ हमे माफ़ करना तेरा सहारा न बन पाये हम , ये जीवन हसते हसते चला गया  भारत माँ का क़र्ज़ चुकाने में , 

हम देश भक्तों को तो सच्ची जनता ही समझती है ,
बहुत से बेईमान भरे पड़े है हैं इस देश में नहीं तो गुलामी इतनी लम्बी कहाँ  होती है ,

याद है फांसी के  पहले की वो रात जब कह दिया था माँ से मैंने ,ना आना पार्थिव भगत को लेने ,
न समझ पाएंगे बेईमान  नेता तेरी  कुर्बानी ,बना देंगे उसको भी बेमानी  

आज भगत ना सह पायेगा अपनी माँ की ये दशा , सच्चे देश भक्तो की माओं की कहा इज़्ज़त  होती है ,
यदि टपक गए तेरे कोमल ह्रदय से दो आंसू , न वक़्त लगेगा लोगो को कहने में ,, भगत की माँ रोती है ,भगत की माँ रोती है ,

ऐ देशभक्तों न चढ़ना अब तुम फांसी पर , अब तो  जी जान लगा देना इन गद्दारों को फांसी चढ़वाने में ,हमने तो सर कटवा दिए देश को आज़ाद करने  में

फिर से आयंगे हम विचार बन कर भारत के वीर जवानो में ..

To be continued...

Thursday, 17 May 2018

सत्ता में आने के बाद भी

जिस नेता को सत्ता  में आने के बाद भी यदि राजनीतिक व्यवस्था ठीक न दिखे  वही एक ईमानदार नेता है।  

Wednesday, 2 May 2018

That boy was silent

वो लड़का मौन था

वो शाम टूटी बोतल ,खाने का डब्बा और पेन था ,
वक़्त भी देखने का  शौकीन  था।

समंदर सिर्फ दूर से ही खामोश दिखता  है, जरा गहराइयों में उतरो ,
सुनामी को संभाले हुए ,रतनाकर का अंतर्मन मौन था ,
समंदर में कई  हीरे समां गए ,हो सकता है किसी रतन  के लिए वो भी बेचैन था।

नदी होती तो उफान मार देती , नाला होता तो बहक जाता ,
लेकिन लड़के का मन समंदर के भाँती अनंत धारिता का बेजोड़ संयोग था।
हाँ वो लड़का अब भी मौन था।

नदियाँ समां जाती हैं समंदर में ,अस्तित्व खो जाती हैं ,
हो सकता किसी नदी के अस्तित्व का   ,
उसके विशाल स्वरुप से अधिक मोल था।

संघर्ष से पा लिया उसने सब कुछ , पर होती हैं कुछ चीज़े जो इंतज़ार से ही मिलती हैं।
अब क्या कहे इंतज़ार तो उसका होता है जिसका समय होता है ,
यूँ तो  पल में चीज़े बदल जाती हैं।
कुछ चीज़े ऐसी होती हैं जो पल को बदल जाती हैं.

जीवित व्यक्ति को लोग मार  कर चले जाते हैं ,
कुछ लोग निर्जीव चीज़ों में जान फूँक जाते हैं।

कहते हैं पल को पकड़ नहीं सकता कोई,

जो भी ज़िद है कर  ले इस पल में पूरी ,
लड़के ने कह दिया पल को अब तो तू वैसे ही बीतेगा जैसा में चाहूँ यही तो ज़िद है मेरी।
लगा रहा है आगे पीछे  चक्कर  लड़के के अब ये पल   ,संरचना करके  थोड़ी ,
बोल दिया लड़के ने अब तो तू तभी बीतेगा जब में नियुक्ति करूंगा  तेरी।

अर्पण करता हूँ सालों बाद आ की मात्रा ,
याद रखना अभी हाल ही में की है ,पल की  बहाली मैंने , धैर्य रखकर थोड़ी ,
पेन से लिख रहा हूँ वर्तमान तेरा , शीतलता बंद है बोतल में , डब्बे में पल ,
देने में देर हो गयी थोड़ी ,
जियो इन पलों को तुम , और कर दो ज़िद मेरी पूरी ,
ये पल गुलाम हैं मेरे ,बीतेंगे वैसे ही जैसे मर्ज़ी हो तेरी...
बाते अभी बाकी हैं सब्र रखना थोड़ी। ..

 क्रमशः(to be continued ..)

That boy was silent

That evening was a broken bottle, a food box and a pen,
time itself also fond of seeing the moment.

The sea looks just silent from a distance, just go deep into the depths,
Handled by the Tsunami, Ratnakar ( Sea)  had intermittent silence,
Many diamonds were settled in the ocean, maybe it was also restless for any rattan (Gem Stone)

If there was a river, it would have been busted;
But the mind of the boy was an unmatched coincidence of Anant Dharita ( Infinite capacity) , like the ocean.
Yes that boy was still silent.

Rivers get equated in the ocean, survival is lost,
May be the existence of a river,
There was more value than Ocean's  huge form.

He got everything from struggle,  but there are some things that come only by waiting.
Now what is waiting for him to happen, whose time is,
In fact, things change in the moment. but its also true ,There are some things that change the moment itself.

People go to kill the living person,Some people are fond of inanimate things.
Says someone can not catch the moment,
Whatever is stubborn, at this moment, complete,

The boy said to the moment, now you will be as it is.
It is being thought that moment is now circling behind the boy, by composition a little,
The boy said, now you will die (Paas)  only when I will appoint you in yours.

The amount of arriving after years of sacrifice,
I have just recently remembered, the restoration of the moment, I have patience,
The pen is currently writing to you, the coolness is closed in the bottle, the moment in the lunch Box,

Late in giving a little,

You live in these moments, and do stubborn my whole,You live my life after this moment.
These moments are slaves, my life will be as it pleases me.These moments will be the way you want..

The rest are still keeping patience a bit. ..

 Respectively (to be continued ..)










Saturday, 17 February 2018

सच्चे दिल से छू लिए

वो औलाद नहीं जन्मी ,जिसने  माँ बाप का दिल दुखा सुख के क्षण बिता लिए ,
और वो कदम कभी नहीं बहके जिन्हे पत्नी ने सच्चे दिल से छू  लिए।